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किन्हा परिवार के स्वतंत्रता सेनानी एवं वीर सपूत
किन्हा परिवार का इतिहास वीरता, त्याग, देशभक्ति और समाज सेवा की गौरवशाली परंपरा से जुड़ा हुआ है। परिवार के अनेक वीरों ने देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया। उपलब्ध पारिवारिक विवरण के अनुसार, किन्हा परिवार के कई सदस्यों ने ब्रिटिश भारतीय सेना में सेवा की, द्वितीय विश्व युद्ध की कठिन परिस्थितियों का सामना किया और नेताजी सुभाष चंद्र बोस तथा आज़ाद हिंद फ़ौज से संबंधित गतिविधियों में भाग लिया।
1. श्री गुटिया राम जी किन्हा
श्री गुटिया राम जी किन्हा किन्हा परिवार के एक वरिष्ठ स्वतंत्रता सेनानी के रूप में स्मरण किए जाते हैं। लेखक के अनुसार, उनकी मुलाकात 9 सितंबर 2013 को हुई थी। उस समय वे स्वयं को स्वस्थ महसूस कर रहे थे और उन्होंने अपने जीवन तथा सैन्य अनुभवों के बारे में विस्तार से बताया था।
जन्म एवं पारिवारिक पृष्ठभूमि
श्री गुटिया राम जी किन्हा का जन्म पेंशन बुक के अनुसार 1 जनवरी 1921 को हुआ था। हालांकि, उनके अपने कथन के अनुसार उनका जन्म लगभग 1914 में हुआ था। वे दो सगे भाइयों में बड़े थे। उनके अनुसार, किन्हा परिवार के बुजुर्ग पहले रैंण गांव में रहते थे और उनका जन्म भी रैंण गांव में ही हुआ था। बाद में परिवार के कई बुजुर्ग शीतलपुरा में बस गए।
सैन्य सेवा एवं द्वितीय विश्व युद्ध
उपलब्ध विवरण के अनुसार, श्री गुटिया राम जी किन्हा वर्ष 1938 में सेना में भर्ती हुए। उन्होंने जेहलम में रंगरूटी की ट्रेनिंग प्राप्त की, जो वर्तमान में पाकिस्तान में है। उस समय उनका मासिक वेतन 18 रुपये बताया गया है।
लेखक के विवरण के अनुसार, वे जर्मनी और इटली से संबंधित युद्ध अभियानों के दौरान लगभग चार वर्षों तक युद्धबंदी रहे। उन्होंने इटली के कसीना नामक स्थान पर अपने अनुभवों का उल्लेख किया। उनके शरीर पर युद्ध के दौरान बम के छर्रे लगने से चेहरे और पैरों पर चोटों के निशान थे। लेखक ने अपने साक्षात्कार के दौरान इन निशानों को प्रत्यक्ष देखने का उल्लेख किया है।
सिंगापुर एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस
श्री गुटिया राम जी के कथन के अनुसार, युद्ध के बाद वे सिंगापुर पहुंचे और उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के भाषण सुने तथा उनके दर्शन किए। उन्होंने अपने सैन्य जीवन, युद्धबंदी रहने और भारत लौटने के अनुभवों का भी वर्णन किया।
मूल विवरण में उनके कथन का उल्लेख है कि वे सिंगापुर की लड़ाई के दौरान घायल हुए थे। इसके बाद उन्हें अन्य सैनिकों के साथ एक स्थान पर ले जाया गया, जहां उन्होंने आठ दिनों तक पानी के जहाज में समुद्र पार किया। परिस्थितियां सामान्य होने के बाद वे भारत लौटे।
उनके शरीर पर युद्ध में लगी चोटों के निशान होने तथा देश की स्वतंत्रता से संबंधित उनके अनुभवों का लेखक ने विशेष उल्लेख किया है। विवरण के अनुसार, सरकार की ओर से उन्हें स्वतंत्रता सेनानी पेंशन भी मिलती थी। मूल लेख में पेंशन की राशि बीस हजार रुपये से अधिक बताई गई है; यह राशि किस समय की है, इसकी अलग से पुष्टि आवश्यक है।
श्री गुटिया राम जी किन्हा का जीवन परिवार के लिए गर्व और सम्मान का विषय बताया गया है। उनके अनुभव किन्हा परिवार के इतिहास तथा देश की स्वतंत्रता के संघर्ष की स्मृतियों का हिस्सा हैं।
2. श्री नन्द लाल जी किन्हा
जन्म एवं प्रारंभिक जीवन
श्री नन्द लाल जी किन्हा का जन्म 5 अक्टूबर 1919 को रोहड़ाई गांव में हुआ था। पारिवारिक विवरण के अनुसार, वे नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आज़ाद हिंद फ़ौज (INA) में अधिकारी के पद पर रहे और उन्होंने अंग्रेजी सेना के विरुद्ध संघर्ष किया।
सैन्य जीवन एवं संघर्ष
उपलब्ध विवरण में सिंगापुर की लड़ाई के दौरान उनके द्वारा कठिन परिस्थितियों का सामना करने का उल्लेख है। वे युवावस्था में कुश्ती के विशेष शौकीन थे।
भारत लौटने के बाद योगदान
भारत लौटने के बाद श्री नन्द लाल जी किन्हा ने गुजरात में कुश्ती का अखाड़ा स्थापित किया। एक अच्छे प्रशिक्षक के रूप में उन्होंने कई युवकों को कुश्ती का प्रशिक्षण दिया और उन्हें अच्छे पहलवान बनाने में योगदान दिया।
बाद में वे अपने गांव रोहड़ाई लौट आए। गांववासियों की इच्छा और शुभकामनाओं से वे लगभग 18 वर्षों तक सरपंच के पद पर आसीन रहे। उन्होंने ग्रामीणों की सेवा की और गांव के विकास में अपना योगदान दिया।
श्री नन्द लाल जी किन्हा का निधन 15 मार्च 1990 को हुआ। रोहड़ाई मोड़ पर मुख्य सड़क के किनारे उनकी समाधि का उल्लेख मूल लेख में मिलता है।
3. श्री लखी राम जी किन्हा
श्री लखी राम जी किन्हा भी रोहड़ाई गांव के किन्हा परिवार के स्वतंत्रता सेनानी के रूप में वर्णित हैं। उपलब्ध पारिवारिक विवरण में उनकी जन्मतिथि निश्चित रूप से ज्ञात नहीं बताई गई है।
मूल लेख के अनुसार, उनका कद लगभग सवा छह फुट था। उनका निधन 2 अक्टूबर 1985 को हुआ।
श्री लखी राम जी किन्हा की समाधि का उल्लेख भी रोहड़ाई मोड़ पर मुख्य सड़क के किनारे किया गया है। लेखक ने रोहड़ाई गांव के उन वीरों को नमन किया है जिन्होंने आज़ाद हिंद फ़ौज में भर्ती होकर देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया।
मूल विवरण के अनुसार, इन स्वतंत्रता सेनानियों को देश सेवा के लिए प्रमाणपत्र और शील्ड देकर सम्मानित किया गया था। इस संबंध में उपलब्ध आधिकारिक अभिलेखों से पुष्टि की जानी चाहिए।
4. श्री फतेह सिंह जी किन्हा — भोंडा कलां
जन्म एवं सैन्य भर्ती
भोंडा कलां, तत्कालीन गुड़गांव क्षेत्र से संबंधित श्री फतेह सिंह जी किन्हा का जन्म 16 मई 1918 को हुआ था। मूल विवरण के अनुसार, वे लगभग 20 वर्ष की आयु में 16 मार्च 1938 को सेना में भर्ती हुए।
जेल जीवन एवं स्वतंत्रता का संघर्ष
पारिवारिक लेख के अनुसार, रंगरूटी के लगभग दो वर्ष बाद उन्हें 1940 में रंगून की जेल भेज दिया गया। इसके बाद वे बरेहेड़ा नामक स्थान पर वर्ष 1943 और 1944 तक रहे। वर्ष 1944 में उन्हें मुलतान भेजा गया और 1945 में वे सिंगापुर पहुंचे।
मूल लेख में उनके जीवन के लगभग छह वर्ष जेलों में व्यतीत होने तथा देश की स्वतंत्रता के लिए कठिन यातनाएं सहने का उल्लेख किया गया है।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस से संबंध
विवरण के अनुसार, वर्ष 1945 में श्री फतेह सिंह जी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के कई ओजस्वी भाषण सुने और उन्हें कई बार देखने का अवसर प्राप्त किया। उनके जीवन में देश सेवा और स्वतंत्रता के संघर्ष का विशेष महत्व बताया गया है।
भारत लौटने के बाद जीवन
भारत लौटने के बाद उन्होंने कृषि कार्य में अपना जीवन लगाया। युद्ध के दौरान उनके शरीर पर कई स्थानों पर छर्रे लगे थे। इसके बावजूद उन्होंने संघर्ष किया। मूल लेख में उनका कद लगभग छह फुट और शरीर सुडौल बताया गया है। वे नेक दिल, उच्च विचारों वाले और कर्मठ व्यक्ति के रूप में वर्णित हैं।
विवरण के अनुसार, उन्हें भारत सरकार की ओर से स्वतंत्रता सेनानी पेंशन मिलती थी। उनका निधन 17 जुलाई 2001 को उनके पैतृक गांव भोंडा कलां में हुआ।
श्री फतेह सिंह जी किन्हा ने देश की स्वतंत्रता के संघर्ष में योगदान देकर अपने परिवार और आसपास के क्षेत्र का नाम रोशन किया। उनका जीवन साहस, समर्पण और देशभक्ति की प्रेरणा देता है।
5. श्री हीरा लाल जी किन्हा
जन्म एवं पारिवारिक पृष्ठभूमि
श्री हीरा लाल जी किन्हा का जन्म 1 जनवरी 1920 को माच्छरौली गांव में हुआ था। मूल लेख के अनुसार, यह गांव पहले रोहतक जिले में आता था। बाद में प्रशासनिक बदलावों के बाद इसे झज्जर जिले में शामिल किया गया।
उनके पिता का नाम श्री अमीलाल जी किन्हा था। उन्हें एक निर्भीक, न्यायप्रिय और सम्मानित व्यक्ति के रूप में वर्णित किया गया है। वे ग्राम सभाओं में अन्याय का विरोध करते थे और सत्य का पक्ष लेने के लिए जाने जाते थे।
सैन्य सेवा एवं युद्ध
उपलब्ध पारिवारिक विवरण के अनुसार, श्री हीरा लाल जी किन्हा सेना में भर्ती हुए और बरेली सेंटर में रंगरूटी की ट्रेनिंग प्राप्त की। बाद में उन्हें जर्मनी से संबंधित युद्ध अभियानों में भेजे जाने का उल्लेख है।
मूल लेख के अनुसार, वे लगभग चार वर्षों तक युद्धबंदी रहे। युद्ध के बाद सिंगापुर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की सेना से जुड़े और भारत की स्वतंत्रता के उद्देश्य से अंग्रेजी सेना के विरुद्ध संघर्ष किया।
युद्ध के दौरान उनके गले के पास, कंधे की ओर गोली लगने का उल्लेख मिलता है। घायल होने के बावजूद उन्होंने संघर्ष जारी रखा।
बाद का जीवन एवं निधन
भारत लौटने के बाद उन्होंने लगभग दो वर्षों तक कृषि कार्य किया। इसके बाद वे फिर भारतीय सेना में लिए गए। मूल लेख के अनुसार, उन्हें 24 सितंबर 1963 को सेना से डिस्चार्ज मिला।
श्री हीरा लाल जी किन्हा का निधन 15 जनवरी 1999 को हुआ। लेख में उनकी आयु 79 वर्ष और 14 दिन बताई गई है। उन्हें किन्हा परिवार का गौरव बढ़ाने वाले वीर स्वतंत्रता सेनानी के रूप में याद किया गया है।
किन्हा परिवार के अन्य स्वतंत्रता सेनानी
मूल लेख में किन्हा परिवार और विभिन्न गांवों से संबंधित अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के नाम भी दिए गए हैं।
- श्री गुटिया राम जी किन्हा — शीतलपुरा, राजस्थान
- श्री नन्द लाल जी किन्हा — रोहड़ाई, हरियाणा
- श्री लखी राम जी किन्हा — रोहड़ाई, हरियाणा
- श्री फतेह सिंह जी किन्हा — भोंडा कलां, हरियाणा
- श्री हीरा लाल जी किन्हा — माच्छरौली, हरियाणा
- श्री पतराम जी — बाढ़सा
- श्री शिवलाल जी किन्हा — बड़दू मुगल, हरियाणा
- श्री मांगे राम जी के पुत्र श्री हरिराम जी के परिवार से संबंधित उल्लेख — गोठड़ा, हरियाणा
गोठड़ा गांव के संबंध में मूल लेख में चन्दगी पुत्र कुरड़ा, जुगती पुत्र कुरड़ा, गुगन पुत्र जोधा, राय सिंह पुत्र श्योनाथ, शिवलाल पुत्र सोजीराम तथा बीरबल पुत्र दानी राम जैसे नाम भी दिए गए हैं। लेखक ने स्पष्ट किया है कि इन व्यक्तियों के स्वतंत्रता सेनानी होने के संबंध में उन्हें पर्याप्त प्रमाण या संदर्भ नहीं मिले थे।
किन्हा परिवार के शहीद
- श्री राजेश किन्हा — सुरखपुर, हरियाणा
- श्री भूप सिंह जी — बाढ़सा, हरियाणा
वीरता पुरस्कार प्राप्त व्यक्ति
- श्री सुरेश किन्हा — भोंडा कलां, हरियाणा
- अपिल कुमार किन्हा — माच्छरौली
- सुरेन्द्र जी किन्हा — गोठड़ा
राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किन्हा परिवार के सदस्य
- विकास किन्हा — माच्छरौली
- श्री रविन्द्र सिंह जी किन्हा — गोठड़ा
- श्री सुरेन्द्र सिंह जी किन्हा — प्रधानाचार्य, माच्छरौली
- श्रीमती मिश्री देवी जी — पूर्व सरपंच, बाढ़सा; मूल लेख के अनुसार राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा सम्मानित
- श्रीमती नेहा चौधरी — श्री नरेन्द्र जी किन्हा के परिवार से संबंधित उल्लेख, फरीदाबाद
किन्हा परिवार की कुछ ख्यातिप्राप्त हस्तियां
- श्री सीता राम जी — खुडन
- श्री राम सरूप जी — सुरखपुर
- श्री डीघ राम जी — पिलाणा
- श्री शाम सिंह जी 'विकल' — भोंडा कलां
- श्रीमती माता धन्नो देवी — बाढ़सा
- श्री मांगे राम जी — माच्छरौली
- श्री शिवकरण जी — नंगला जोगियान
- श्री बकतावर सिंह जी — माच्छरौली
किन्हा परिवार की गौरवशाली विरासत
किन्हा परिवार के स्वतंत्रता सेनानियों, शहीदों, वीरता पुरस्कार प्राप्त व्यक्तियों और समाजसेवियों का योगदान परिवार की ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इन व्यक्तियों के जीवन, उपलब्धियों और बलिदान से संबंधित अभिलेखों को एकत्रित करना तथा अगली पीढ़ियों तक पहुंचाना आवश्यक है।
स्रोत एवं ऐतिहासिक सत्यापन: यह सामग्री उपलब्ध पारिवारिक विवरण, लेखक के साक्षात्कार और स्थानीय परंपराओं पर आधारित है। जन्मतिथियों, सैन्य सेवा, युद्धबंदी रहने की अवधि, INA में पद, पुरस्कार और सरकारी पेंशन संबंधी विवरणों की पुष्टि उपलब्ध आधिकारिक अभिलेखों से की जानी चाहिए।
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